Sunday, November 16, 2008

इंडिया गेट पर बहस




6 comments:

नारदमुनि said...

hamare yaha bahas adhik hoti hai, kaam kam
narayan narayan

तीसरा स्वाधीनता आंदोलन said...

teesra swadhinta andolan kam ke sath bahas krta hai taki josh ks sath hosh bna rhe.

Amit K. Sagar said...

ब्लोगिंग जगत में आपका स्वागत है. खूब लिखें, खूब पढ़ें, स्वच्छ समाज का रूप धरें, बुराई को मिटायें, अच्छाई जगत को सिखाएं...खूब लिखें-लिखायें...
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आप मेरे ब्लॉग पर सादर आमंत्रित हैं.
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अमित के. सागर
(उल्टा तीर)

Tarun Goel said...

बहुत दिनों बाद वापिस आया हूँ, क्षमा चाहूँगा। आपका मेल देख के बहुत खुशी हुई की आपने मुझे सीरियसली लिया, पर आज भी "आप" और "आपका" स्वाधीनता संग्राम वहीँ का वहीँ फंसा हुआ है। झंडा फेह्राने से लेकर बहस करने तक। मैं नहीं जानता की इस बहस के सफल होने से किसको खुशी मिलेगी, मरे हुए इंसानों को, या उनके परिवारों को(मैं नहीं जानता कैसे झंडा फेह्राने से उनको खुशी मिल सकती है) या फिर आपके अंहकार को आजकल मैं बंगलोर में रहता हूँ , यहाँ देखता हूँ की बड़ी बड़ी इमारते हैं, पर लोग आज भी गरीब हैं। उनको झंडा फेह्राने से कैसे खुशी मिलेगी, पता नहीं। गांधी जी ने कहा था की कोई काम करने से पहले सोचो की कैसे उससे उस गरीब को फरक पड़ता है, जो आपने कभी देखा हो। अगर ज्यादा कह गया तो क्षमा चौंगा, पर अगर आप ठीक कर रहे हैं तो राज ठाकरे भी ग़लत नहीं है।
जय हिंद, जय भारत।

तीसरा स्वाधीनता आंदोलन said...

trun bhai aaj agar raj thakre ke nafrat failane ke abhiyan oar teesra swkdhinta andolan dwara rastriy ekta ttha schchi deshbakti ki chetna paida krne ke liye india gate ki bjay sajhi shhadat-shajhi birasat ke prateek deshbhkt shheedon ko rastriy smark ko apna aadrsh bnane ki muhim me antar smajh nhi aa rha to esme aap ka dosh nhi hai. halat hi aisa bnaya ja rha hai ki kuch smajh me n aaye. yah muhim ahankar pura krne ke liye nhi hai oar n hi fsa huaa hai. samajh boojh krke hi chlaya ja rha hai.sbako roti,sbako samman hasil krne ke sbse phala hme ek hona hoga oar eski prenna ke liye hme mjbooti se hme apne shheedon v unke aadrson ko samne lana hoga.jiski yah suruvat hai.

रचना गौड़ ’भारती’ said...

भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
लिखते रहिए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल और शेर के लिए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
www.zindagilive08.blogspot.com
आर्ट के लिए देखें
www.chitrasansar.blogspot.com